ग्रीष्म
धूप जले आंगन में कलियां
बिखर रहीं गुलमोहर की
चला गया ऋतुराज तो क्या?
अब माटी महक रही घर की
सूख गईं नदियां और सरवर
सूख गये कुसुमाकर सब
हरे दूब हो गये हैं धूसर
पत्ते हरे खड़कते हैं अब
सांय-सांय चलती पुरवाई
सूरज गल के बरस रहा
चारो ओर उदासी छाई
चातक जल को तरस रहा
धूल भरे नैनों में आंधी
अनयास ही मेघ दिखाये
ऋतु की रेश्मी डोर से बांधी
मोती है ये ग्रीष्म बताये।




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