सन्नाटा
नगर के दूसरे छोर पर सन्नाटा फैला है, नितांत सन्नाटा।
गलियों में, सड़कों पर, मौन का राज्य स्थापित है।
लोग आते-जाते हैं, फिर भी सन्नाटा है! आखिर क्यों?
क्या एकसाथ सभी मनुष्यों ने मौन धारण कर लिया है?
नहीं, दूर वहां पूरब दिशा के गांवों की सरहदों पर, कुछ लोग प्रेम व्यक्त कर रहे हैं।
अभी वहाँ पहुवा का झोका नहीं पहुंचा है।




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